अहमदाबाद: गुजरात रोड सेफ्टी अथॉरिटी ने शहर में चिन्हित किए 33 खतरनाक ब्लैकस्पॉट
गुजरात के अहमदाबाद शहर में बेकाबू रफ्तार, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग (Mobile Use) और गलत दिशा में ड्राइविंग (Wrong Side Driving) करने की आदतों के कारण सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अप्रत्याशित और चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गुजरात रोड सेफ्टी अथॉरिटी द्वारा किए गए सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) के अनुसार, शहर के भीतर ऐसे 33 सबसे संवेदनशील दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैकस्पॉट (Blackspots) की पहचान की गई है, जहां लगातार हादसे हो रहे हैं। इन आंकड़ों में नरोडा पाटिया क्षेत्र सबसे खतरनाक साबित हुआ है, जहां पिछले कुछ समय में हुए 20 गंभीर हादसों में 14 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसके अलावा शांतिपुरा चार रास्ता, इस्कॉन रोड और जूना वाडज सर्कल भी ऐसे प्रमुख स्थानों में शामिल हैं, जहां भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही और पैदल यात्रियों के लिए संकरे रास्ते होने के कारण दुर्घटनाओं का एक निश्चित और डरावना पैटर्न (Pattern) देखने को मिल रहा है।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहर में सार्वजनिक परिवहन के नए ढांचे और कुछ ढांचागत कमियां भी इन हादसों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उदाहरण के तौर पर, रबारी कॉलोनी चार रास्ता के पास बने मेट्रो पिलर पर रात के समय चमकने वाली रिफ्लेक्टिव शीट (Reflective Sheet) नहीं लगाई गई है, जिसके कारण अंधेरे में वाहन चालकों को पिलर दिखाई नहीं देते और वे सीधे टकरा जाते हैं। इसी तरह बोपल के वकील साहब ब्रिज के पास भी लगातार एक्सीडेंट्स का ग्राफ बढ़ रहा है, जहां अब तक 14 गंभीर मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इन हादसों को रोकने के लिए नगर निगम को तुरंत कदम उठाने होंगे, जिसके तहत शहर के सभी मुख्य चौराहों पर नए जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing) बनाने, स्टॉप लाइन्स को री-पेंट करने और सड़कों पर उचित रिफ्लेक्टिंग विजुअल मार्किंग (Marking) लगाने की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में कीमती इंसानी जिंदगियों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

