अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील का रोडमैप तैयार, कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता से टला युद्ध का खतरा, प्रतिबंध हटने से ईरान को बड़ी कामयाबी
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच आयोजित की गई उच्च स्तरीय परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) की शुरुआत भले ही ठंडी रही हो, लेकिन देर रात तक चली मैराथन वार्ताओं के बाद वैश्विक शांति के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। इस पूरी बातचीत में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि दोनों देश आगामी 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थाई परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए हैं। इस सकारात्मक प्रगति के बाद दोनों देशों के तकनीकी दल अब पूरे सप्ताह स्विट्जरलैंड में रहकर संधि के बारीक नियमों को अंतिम रूप देंगे। इस कूटनीतिक सफलता के कारण मिडिल ईस्ट (Middle East) में लंबे समय से बना युद्ध का खतरा टल गया है और दोनों देशों के बीच भविष्य के सभी आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को सुधारने के लिए एक मजबूत नींव तैयार हो गई है।
इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक के बाद मुख्य रूप से तीन बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलડમરુमध्य (Strait of Hormuz) में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच किसी भी संभावित सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक विशेष हॉटलाइन संचार व्यवस्था स्थापित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, लेबनान में जारी हिंसा को तुरंत रोकने के लिए एक संयुक्त ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ (De-Confliction Cell) के गठन पर भी सहमति बनी है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पर इस सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि कतर-पाकिस्तान के साझा प्रयासों से ईरान के तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटा लिया गया है और अमेरिकी नौसेना ने अपना कड़ा नौसैनिक ब्लॉकेड (Naval Blockade) भी पूरी तरह हटा दिया है। साथ ही, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी अब रिलीज (Release) करने की मंजूरी मिल गई है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

