महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर 2.0’ से खलबली: उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायकों के पाला बदलने का दावा, खतरे में बची हुई शिवसेना
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बहुत बड़े राजनीतिक उलटफेर (Political Turmoil) के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के चंद दिनों के भीतर ही उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका देने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शिंदे सरकार के कैबिनेट मंत्री गुलाबराव पाटिल ने शुक्रवार को एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि राज्य में ‘ऑपरेशन टाइगर 2.0’ (Operation Tiger 2.0) सक्रिय हो चुका है। पाटिल के अनुसार, उद्धव ठाकरे की पार्टी के 14 से अधिक विधायक बहुत जल्द पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं। गौरतलब है कि वर्तमान विधानसभा में उद्धव ठाकरे के पास कुल 20 विधायक बचे हैं, जिनमें से 10 विधायक अकेले मुंबई क्षेत्र के हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अपनी विधानसभा सदस्यता (Assembly Membership) गंवाए बिना अलग होने के लिए किसी भी गुट को कम से कम दो-तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है, और शिंदे गुट का दावा इसी जादुई आंकड़े को छूने का है।
इस संभावित टूट की खबरों के बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। हाल ही में पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला करते हुए उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि देश की आजादी के लिए लड़ने वाले क्रांतिकारी बागी थे, लेकिन जो लोग हमारे चुनाव चिह्न (Election Symbol) पर जीतकर निजी स्वार्थ के लिए चले गए, वे बागी नहीं बल्कि गद्दार हैं। उन्होंने बागियों पर 50 से 60 करोड़ रुपये में बिकने का संगीन आरोप भी लगाया है। दूसरी ओर, अपने बचे हुए सियासी किले को सुरक्षित रखने के लिए उद्धव ठाकरे ने नागपुर से तीन दिवसीय व्यापक पॉलिटिकल आउटरीच प्रोग्राम (Political Outreach Program) की शुरुआत की है, जिसके तहत वे बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि हालिया मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान उद्धव गुट के कम से कम 4 विधायकों ने मुख्यमंत्री शिंदे से गुप्त रूप से मुलाकात की थी, जिससे इन दावों को और बल मिल रहा है।

