अहमदाबाद में प्रदूषण का कहर: पीएम10 स्तर बढ़कर 101 के पार, शहर की हवा हुई जहरीली
अहमदाबाद शहर की सड़कों पर कछुआ गति से रेंगते और जहरीला काला धुआं उगलते वाहन आम शहरियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। अनियंत्रित रूप से धुआं उगलते वाहनों और कचरा उठाने वाली गाड़ियों के कारण वर्ष 2025-26 में अहमदाबाद का वार्षिक पीएम10 (PM10) स्तर बढ़कर 101 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय मानक (National Standard) की 60 माइक्रोग्राम की निर्धारित सीमा की तुलना में 68 प्रतिशत अधिक है। शहर में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या इस स्थिति को और विकराल बना रही है। वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, जहां पूरे गुजरात के कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में परिवहन क्षेत्र का योगदान 13 प्रतिशत था, वहीं अकेले अहमदाबाद जिले में यह आंकड़ा बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण पर भारी दबाव बना रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण में हो रही इस आपराधिक लापरवाही पर सीएजी (CAG) की हालिया ऑडिट रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 39.13 लाख वाहनों के पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुके हैं, फिर भी वे बेधड़क सड़कों पर चल रहे हैं। इतना ही नहीं, 2009 से 2019 के बीच पंजीकृत 69.29 लाख वाहनों ने पिछले पांच वर्षों में एक बार भी पीयूसी रिन्यू (Renew) नहीं कराया। शहर के 110 जंक्शनों पर स्थापित 1,079 सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) के माध्यम से ई-चालान (E-Challan) जारी करने का दावा करने वाला प्रशासन जमीनी स्तर पर इन धुआं उगलते वाहनों को रोकने और कड़ा जुर्माना लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

