मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर असर, आईएमएफ ने दी महंगाई बढ़ने की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund – IMF) की अक्टूबर 2026 की ‘एशिया-पैसिफिक रीजनल इकोनॉमिक रिपोर्ट’ के अनुसार, यदि ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में महंगाई का दबाव (Inflation pressure) काफी बढ़ सकता है। हालांकि, भारत ने इस संकट के बीच अन्य वैश्विक स्रोतों से क्रूड ऑयल (Crude oil) खरीदकर अपनी घरेलू आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया है। इसके बावजूद रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कच्चे तेल की तुलना में रिफाइंड प्रोडक्ट्स (Refined products) जैसे डीजल और जेट फ्यूल के दाम ज्यादा तेजी से बढ़े हैं, जिससे गुड्स ट्रांसपोर्टेशन (Goods transportation) महंगा हो सकता है और आम जनता के बजट पर सीधा असर पड़ सकता है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को देखते हुए आईएमएफ ने भारत सरकार को सभी के लिए फ्यूल सब्सिडी (Fuel subsidy) देने के बजाय केवल जरूरतमंद और कमजोर वर्गों तक ही राहत योजनाएं सीमित रखने का सुझाव दिया है। इन तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद काफी मजबूत बनी हुई है। बेहतर घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर (Service sector) के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी (GDP growth) 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो देश के आर्थिक स्थायित्व को दर्शाता है।

