गुजरात डायलिसिस प्रोग्राम में बड़ा खुलासा, 52% तकनीशियन फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे कर रहे थे काम
गुजरात में गरीब और मध्यम वर्ग के किडनी मरीजों के लिए संचालित ‘गुजरात डायलिसिस प्रोग्राम’ (Gujarat Dialysis Program) के तहत हीमोडायलिसिस तकनीशियनों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सीएजी (CAG report) के हवाले से किए गए दावों के अनुसार, राज्य में अहमदाबाद की प्रसिद्ध किडनी इंस्टीट्यूट (Kidney Institute Ahmedabad) के अंतर्गत संचालित 250 से अधिक डायलिसिस सेंटरों में कार्यरत 662 तकनीशियनों में से करीब 52 प्रतिशत यानी 346 कर्मचारियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या सरकारी बोर्ड की जगह ‘भारत सेवक समाज’ नामक संस्था का प्रमाण पत्र है। डायलिसिस जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है, ऐसे में अमान्य शैक्षणिक योग्यता (Academic qualification) और अधूरी ट्रेनिंग वाले स्टाफ की नियुक्ति से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में आउटसोर्सिंग एजेंसी (Outsourcing agency) के ऑफर लेटर की एक अजीब शर्त ने भी विवाद पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवारों को नौकरी पर शामिल होने के एक वर्ष के भीतर कक्षा 12वीं (12th standard) पास करने की ढील दी गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भर्ती के समय न्यूनतम योग्यता का भी पालन नहीं किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से उच्च स्तरीय जांच समिति (High-level investigation committee) गठित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों के सर्टिफिकेट्स की गहन सत्यापन जांच (Verification process) कराने और लापरवाही बरतने वाली प्राइवेट एजेंसियों तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर अपील की गई है।

