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अहमदाबाद में ट्रैफिक दंड का अंबार: दो साल में वसूले ₹413 करोड़, सुविधाओं के नाम पर शून्य

अहमदाबाद शहर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन (Violation) के नाम पर पिछले दो वर्षों में नागरिकों से कुल 413 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना वसूला गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा जुटाया गया यह दंड सरकारी खजाने में जमा होने वाली उस राशि से भी अधिक है, जो पुलिस कर्मचारियों को वेतन के रूप में दी जाती है। साल 2024 में जहाँ 151 करोड़ रुपये वसूले गए थे, वहीं साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 262 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। हालांकि, पुलिस बल की कमी के बावजूद इस तोकबंद वसूली (Massive Recovery) ने आम जनता और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है, क्योंकि सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी कम होने के बावजूद जुर्माने की रसीदें तेजी से कट रही हैं।

नियमों के अनुसार, दंड से मिलने वाली इस राशि को ट्रैफिक सुविधाओं, जन जागरूकता और सड़क इंजीनियरिंग (Road Engineering) में सुधार के लिए वापस दिया जाना चाहिए, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से अहमदाबाद नगर निगम और पुलिस विभाग को इस मद में कोई महत्वपूर्ण सहायता (Grant) वापस नहीं मिली है। जनता से वसूले गए अरबों रुपये सरकारी फाइलों में दबे पड़े हैं, जबकि सड़कों पर ज़ेबरा क्रॉसिंग, ट्रैफिक सिग्नल और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी (Shortage) देखी जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार का लक्ष्य केवल राजस्व (Revenue) बढ़ाना है या वास्तव में ट्रैफिक प्रबंधन (Management) में सुधार करना।

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