चीन के साथ सुधरेंगे व्यापारिक रिश्ते: सरकारी ठेकों से हट सकता है प्रतिबंध, भारत सरकार कर रही है तैयारी
भारत सरकार वर्ष 2020 के सीमा विवाद के बाद चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को हटाने की योजना बना रही है। वित्त मंत्रालय उन नियमों को समाप्त करने पर विचार कर रहा है, जिसके तहत चीनी कंपनियों को सरकारी परियोजनाओं (Government Projects) के लिए बोली लगाने से पहले अनिवार्य सुरक्षा जांच और पंजीकरण से गुजरना पड़ता था। इस निर्णय का मुख्य कारण कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हो रही देरी है, क्योंकि बिजली संयंत्रों और अन्य निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक मशीनरी (Machinery) मुख्य रूप से चीन से आयात की जाती है। पूर्व कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने भी इन प्रतिबंधों (Restrictions) में ढील देने की सिफारिश की है ताकि आगामी वर्षों में देश की बिजली क्षमता को तेजी से बढ़ाया जा सके।
इस कूटनीतिक बदलाव के पीछे वैश्विक राजनीति (Global Politics) के बदलते समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक ओर जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया है, वहीं दूसरी ओर भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, सरकार अभी भी सतर्कता बरत रही है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर लगे प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे। सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) की जटिल कागजी कार्रवाई को कम करने से चीनी पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा मिलने में भी आसानी होगी। इस संवेदनशील मामले पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा लिया जाएगा, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक हितों (Economic Interests) दोनों को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश जारी करेगा।

