जलवायु सम्मेलन COP33 की मेजबानी से भारत के कदम पीछे: पीएम मोदी ने दुबई में रखा था प्रस्ताव
भारत ने साल 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP33) की मेजबानी का अपना आधिकारिक प्रस्ताव वापस ले लिया है। इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद साल 2023 में दुबई में हुए COP28 के दौरान इस आयोजन के लिए भारत की दावेदारी पेश की थी। उस समय भारत ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प जताया था। हालांकि, अब आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अपने इस फैसले की जानकारी दे दी है, लेकिन इसके पीछे के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत इस महा-आयोजन के लिए काफी गंभीर नजर आ रहा था और जुलाई 2025 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा एक विशेष ‘COP33 सेल’ (Cell) का गठन भी किया गया था। इस सेल का मुख्य उद्देश्य साल 2028 के शिखर सम्मेलन (Summit) के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और रणनीतियों को तैयार करना था। संयुक्त राष्ट्र के ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज’ (COP) मंच पर दुनिया भर के देश बढ़ते तापमान और पर्यावरण संकट से निपटने के लिए नीतियां बनाते हैं। भारत की इस अचानक वापसी (Withdrawal) ने विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि अगले सम्मेलनों की मेजबानी के लिए तुर्किये, ऑस्ट्रेलिया और इथियोपिया जैसे देश पहले से ही कतार में हैं। भारत के इस कदम को वैश्विक मंच पर उसकी भावी पर्यावरणीय प्राथमिकताओं (Priorities) में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

