डिजिटल ठगी पर RBI का ‘मास्टर प्लान’: 22,931 करोड़ के नुकसान के बाद जागे बैंक, अब बड़े ट्रांजेक्शन में होगा विलंब
डिजिटल भुगतान में बढ़ते धोखाधड़ी (Fraud) के मामलों को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सुरक्षा के कड़े नियमों का एक नया मसौदा (Draft) जारी किया है। साल 2025 में करीब ₹22,931 करोड़ की भारी राशि साइबर ठगी की भेंट चढ़ने के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में साइबर धोखाधड़ी के जहाँ केवल 2.6 लाख मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 28 लाख तक पहुँच गई है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत, अब ₹10,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान को तुरंत प्रोसेस (Process) करने के बजाय उसमें थोड़ा विलंब (Delay) किया जाएगा ताकि संदिग्ध लेनदेन की पहचान हो सके। इसके अलावा, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के खातों से ₹50,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन (Transactions) होने पर उनके द्वारा अधिकृत किसी भरोसेमंद व्यक्ति की अनुमति अनिवार्य करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों और आम जनता का मानना है कि केवल नियम बनाना काफी नहीं है, बल्कि ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर बैंकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानकर ग्राहकों को मुआवजा (Compensation) देने की कानूनी बाध्यता होनी चाहिए। अक्सर यह देखा गया है कि साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कई मामलों में पैसा वापस नहीं मिल पाता है। शिकायत दर्ज करने में होने वाली देरी, जो कई बार अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण 48 घंटों तक खिंच जाती है, अपराधियों को पैसा ठिकाने लगाकर भागने में मदद करती है। बैंकिंग तंत्र को और अधिक उत्तरदायी (Responsive) बनाने की आवश्यकता है ताकि तकनीक के साथ-साथ न्याय की प्रक्रिया भी तेज हो सके। आम नागरिकों को भी यह सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सावधान रहें और अपनी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

