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EV प्रोत्साहन में गुजरात को मिले 100 में से सिर्फ 37 अंक, टॉप 10 राज्यों से भी बाहर

ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच देश में पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन गुजरात के संदर्भ में केंद्रीय रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (India Electric Mobility Index) में प्रगतिशील माना जाने वाला गुजरात राज्य देश भर में 16वें स्थान पर धकेला गया है। केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट से साफ है कि राज्य की ईवी पॉलिसी (EV Policy) के पांच साल बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन बेहद निराशाजनक रहा है। सूचकांक के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद और संचालन को बढ़ावा देने के मामले में गुजरात ने 100 में से केवल 37 का स्कोर (Score) प्राप्त किया है, जबकि रिसर्च और डेवलपमेंट में उसे 46 अंक मिले हैं। सबसे खराब स्थिति कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के मामले में है, जहां राज्य को महज 5 अंक मिले हैं और वह देश में 27वें स्थान पर फंसा हुआ है।

रिपोर्ट से उजागर हुई वास्तविक स्थिति यह है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) के विकास में गुजरात 44 अंकों के साथ देश में 22वें स्थान पर है, और चार्जिंग पॉइंट सूचकांक में उसे केवल 24 अंक प्राप्त हुए हैं। सार्वजनिक परिवहन की बात करें तो राज्य में इलेक्ट्रिक बसों का पंजीकरण भी बेहद सुस्त रहा है; जहां वर्ष 2023 में 106, 2024 में 331, 2025 में 124 और मार्च 2026 तक केवल 137 इलेक्ट्रिक बसें (Electric Buses) ही दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, वर्ष 2014 से 2021 के बीच छह वर्षों की लंबी अवधि में महज 7,923 छात्रों को टू-व्हीलर्स और सिर्फ 87 थ्री-व्हीलर रिक्शा के लिए सरकारी सब्सिडी (Subsidy) प्रदान की गई है। यह संपूर्ण डेटा स्पष्ट करता है कि बुनियादी सुविधाओं और सरकारी इच्छाशक्ति के अभाव के कारण गुजरात शीर्ष 10 राज्यों की सूची में भी अपनी जगह बनाने में पूरी तरह विफल रहा है, जो पर्यावरण सुधार के प्रति प्रशासन की गंभीरता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।

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