गुजरात में खरीफ बुवाई का धमाकेदार आगाज: किसानों ने एक लाख हेक्टेयर से अधिक में किया कपास का उत्पादन, मूंगफली की खेती में भी भारी उछाल
गुजरात में खरीफ सीजन 2026 (Kharif Season) की शुरुआत के साथ ही राज्य के किसानों में खेती को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है और जून महीने में बुवाई के अनुकूल बारिश की उम्मीद में धरतीपुत्रों ने खेतों में बीज रोपने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी प्रारंभिक दो सप्ताह के आधिकारिक आंकड़ों (Official Statistics) के अनुसार, राज्य में कपास का बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष के 34,011 हेक्टेयर के मुकाबले इस साल तीन गुना बढ़कर 93,449 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जिसे जमीनी स्तर पर एक लाख हेक्टेयर से ऊपर माना जा रहा है। इसके साथ ही, तेल मिलों की रीढ़ मानी जाने वाली मूंगफली (Groundnut) की बुवाई भी पिछले साल के 31,110 हेक्टेयर की तुलना में बढ़कर 54,778 हेक्टेयर दर्ज की गई है। कुल मिलाकर राज्य में अब तक 1.74 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में शुरुआती बुवाई पूरी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 96 हजार हेक्टेयर अधिक है। गुजरात में होने वाली कुल 85 लाख हेक्टेयर की खेती में अकेले कपास और मूंगफली का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक रहता है, जिसका मुख्य केंद्र सौराष्ट्र क्षेत्र (Saurashtra Region) है।
राष्ट्रीय स्तर (National Level) पर भी इस सीजन के दौरान प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में कॉटन एरिया (Cotton Area) में उल्लेखनीय वृद्धि होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जिससे देश का कुल बुवाई क्षेत्र 130 लाख हेक्टेयर के पार जाने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य प्रतिस्पर्धी फसलों की तुलना में कपास को कम पानी की आवश्यकता होती है, जिसके कारण कम वर्षा के पूर्वानुमान के बावजूद किसान इस नकदी फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (MSP) में की गई बढ़ोतरी ने भी किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हुए कड़ा प्रोत्साहन दिया है। अनुमान है कि इस बार मध्य भारत में कपास के रकबे में 15 प्रतिशत और दक्षिण भारत के राज्यों में 10 से 20 प्रतिशत तक का भारी इजाफा देखने को मिल सकता है, जो आने वाले समय में देश के कपड़ा उद्योग और पशु आहार क्षेत्र के लिए कच्चे माल की आपूर्ति को और अधिक मजबूत करेगा।

