सूरत पुलिस की बर्बरता पर गुजरात हाई कोर्ट ने लिया सुओ मोटो संज्ञान
सूरत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से हथकड़ी पहनाकर सड़क पर घुमाने और लाठियों से पीटने के कथित सनसनीखेज मामले ने पूरे राज्य में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए गुजरात हाई कोर्ट के एडवोकेट उत्कर्ष दवे ने चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल को एक औपचारिक पत्र लिखा था, जिसके आधार पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए याचिका दर्ज की है। पत्र में प्रस्तुत अभ्यावेदन के अनुसार, सूरत के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) राजदीपसिंह नकुम सहित 15 से 20 पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने आरोपियों के साथ सरेआम बेहद अमानवीय और गैर-कानूनी व्यवहार किया। याचिकाकर्ता ने कानून का उल्लंघन करने वाले इन सभी जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, जिस पर हाई कोर्ट में आने वाले दिनों में विस्तृत सुनवाई (Hearing) आयोजित की जाएगी।
अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक, 14 जुलाई 2026 को घटी इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में तेजी से प्रसारित (Viral) हुए थे। इन वीडियो में आरोपियों को हाथ में हथकड़ी लगाकर सार्वजनिक सड़कों पर घुमाते हुए, बाल खींचते, थप्पड़ मारते और लाठियों से पीटते हुए देखा जा सकता है। एडवोकेट ने दलील दी है कि अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले ही आरोपियों को इस तरह सरेआम सजा देना भारत के संविधान (Constitution) में निहित मौलिक अधिकारों और कानून की तय प्रक्रिया के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियां ही अपनी सीमाएं लांघने लगेंगी, तो न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास डगमगा जाएगा; इसीलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच (Independent Investigation) कराने और भविष्य के लिए सख्त गाइडलाइन्स तय करने की पुरजोर मांग की गई है।

