ગુજરાત

भाजपा विधायक रमनलाल वोरा के परिवार की 7 एकड़ से अधिक कृषि भूमि होगी ‘सरकारी’

गुजरात विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान भाजपा विधायक रमनलाल वोरा को फर्जी दस्तावेजों के सहारे ‘किसान खातेदार’ बनना बेहद भारी पड़ गया है। सत्ता और राजनीतिक प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग कर उनके द्वारा अपने ही निर्वाचन क्षेत्र ईडर के दावड़ गांव में खरीदी गई 7 एकड़ से अधिक की कीमती कृषि भूमि (Agricultural Land) को अब ‘श्री सरकार’ यानी सरकारी घोषित करने का ऐतिहासिक आदेश ईडर मामलतदार द्वारा जारी किया गया है। गुजरात के राजनीतिक इतिहास में सत्तारूढ़ दल के किसी वर्तमान विधायक के खिलाफ इस प्रकार की यह संभवतः पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों में भारी सरगर्मी बढ़ा दी है। आरोपों के अनुसार, रमनलाल वोरा ने फर्जी दस्तावेज (Forged Documents) तैयार कर अपनी पत्नी कुसुमबेन और बेटों सुहाग व भूषण वोरा के नाम पर इस पूरी जमीन का सौदा किया था, लेकिन यह गैरकानूनी खेल लंबे समय तक नहीं टिक सका और मामला गनोत पंच (Tenancy Tribunal) के पास पहुंच गया।

इस गंभीर भूमि घोटाले की जांच कर रही ईडर की मामलतदार पूजा जोशी ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के कानून के तहत यह सख्त कदम उठाया है। मामलतदार कोर्ट (Mamlatdar Court) द्वारा विधायक और उनके परिवार को खुद को असली किसान साबित करने वाले वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बार-बार समन (Summons) जारी किए गए थे, लेकिन वीआईपी प्रोकॉल की आड़ में परिवार का कोई भी सदस्य अदालत की किसी भी तारीख पर उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद, गनोत धारा के नियमों का उल्लंघन करने पर प्रशासन ने उन पर जंत्री दरों के अनुसार 300% का भारी जुर्माना (Financial Penalty) भी लगाया था, जिसे चुकाने में वे पूरी तरह विफल रहे। बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद कोई कानूनी सबूत न मिलने और नियमों की अवहेलना किए जाने के कारण अंततः कोर्ट ने इस विवादित भूमि को आधिकारिक रूप से जब्त कर सरकारी संपत्ति घोषित करने का अंतिम फैसला सुना दिया है।

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