गुजरात में ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश: 3 साल में हजारों किलो नशीला पदार्थ जब्त, लेकिन जांच की खामियों से छूट रहे आरोपी
महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि गुजरात में दशकों से शराबबंदी और नशाबंदी का कानून लागू है, लेकिन हालिया आंकड़े इसकी जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। समुद्री और सड़क मार्गों के जरिए राज्य में करोड़ों रुपये का नशीला पदार्थ पहुंचाया जा रहा है, जिससे गुजरात ड्रग्स माफियाओं के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट बनता दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 3 वर्षों में राज्य से 65,549 किलो ड्रग्स, 45,564 नशीली गोलियां और 4,841 लीटर तरल नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके अलावा पिछले 2 वर्षों में 121 किलो हाई-क्वालिटी कोकीन (High-Quality Cocaine) भी पकड़ी गई है, जिसके चलते पिछले 3 सालों में पुलिस रिकॉर्ड में कुल 1,649 मामले दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में जब्ती और विशाल नेटवर्क का भंडाफोड़ होने के बावजूद अदालतों में बहुत कम आरोपियों को सजा (Conviction) मिल पा रही है। ज्यादातर मामलों में आरोपी कोर्ट से बरी हो जाते हैं या आसानी से बेल (Bail) हासिल कर लेते हैं, जिसके पीछे पुलिस की कमजोर जांच प्रक्रिया को मुख्य वजह माना जा रहा है। स्थानीय पुलिस में अनुभव की कमी, चार्जशीट (Chargesheet) में रह जाने वाली कानूनी कमियां और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव के कारण बचाव पक्ष के वकील केस को कमजोर कर देते हैं। डिजिटल फॉरेंसिक (Digital Forensics) और चेन ऑफ कस्टडी (Chain of Custody) को मजबूत तरीके से पेश न कर पाने की वजह से नशे के बड़े सौदागर कानून के शिकंजे से बाहर निकल आते हैं।

