આંતરરાષ્ટ્રીય

नेपाल में जलप्रलय का तांडव: 587 से अधिक लोगों की मौत, भारत ने तुरंत बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और बेली ब्रिज किए रवाना

विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन (Flash Flood) से जूझ रहे नेपाल में विदेशी सहायता को लेकर उठे विवादों के बीच सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि देश ने किसी भी मित्र राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिलने वाली सहायता को अस्वीकार नहीं किया है। शनिवार तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में 587 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,900 से अधिक लोग अब भी दुर्गम पहाड़ी इलाकों और हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स (Hydropower Projects) की अंधेरी सुरंगों में फंसे या लापता हैं। नेपाल सरकार ने बताया कि शुरुआती चरण में स्थानीय भौगोलिक स्थिति से बेहतर परिचित होने के कारण 15,000 से अधिक स्थानीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था, लेकिन अब सुरंगों में बचाव कार्य और फॉरेंसिक एनालिसिस (Forensic Analysis) जैसे तकनीकी कार्यों के लिए सीमित अंतरराष्ट्रीय मदद स्वीकार की जा रही है।

बाढ़ के कारण रसुवा और नुवाकोट जिलों में तीन दर्जन से अधिक पुल बह जाने से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिसे बहाल करने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज (Belly Bridges) उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। नेपाल की इस अपील पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के विमानों के जरिए अब तक 57.5 टन से अधिक राहत सामग्री की तीन खेप काठमांडू पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके अलावा, भारत ने टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम, 11 सदस्यीय मेडिकल टीम (Medical Team) और बेली ब्रिज निर्माण के लिए विशेष तकनीकी टीमों को भी नेपाल के लिए रवाना कर दिया है।

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