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स्वदेशी शक्ति का शंखनाद: नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ INS तारागिरी, राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में दी सलामी

भारतीय नौसेना ने आज अपनी समुद्री शक्ति को और अधिक सुदृढ़ करते हुए स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) ‘आईएनएस तारागिरी’ (F41) को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। विशाखापत्तनम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस युद्धपोत का आधिकारिक शुभारंभ किया। ‘प्रोजेक्ट 17A’ के तहत निर्मित यह चौथा और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया तीसरा महत्वपूर्ण जहाज है। इस युद्धपोत (Warship) की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक है, जो इसे दुश्मन के रडार (Radar) की नजरों से बचकर हमला करने में सक्षम बनाती है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत तैयार किए गए इस जहाज में 75% से अधिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।

तकनीकी रूप से आईएनएस तारागिरी दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हथियारों से लैस है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एमएफ-स्टार रडार और एमआरएसएएम (MRSAM) एयर डिफेंस सिस्टम लगाया गया है, जो किसी भी हवाई खतरे को पलक झपकते ही नष्ट कर सकता है। इसके अलावा, पनडुब्बी रोधी (Anti-Submarine) अभियानों के लिए इसमें शक्तिशाली रॉकेट और टॉरपीडो भी शामिल किए गए हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि तारागिरी केवल एक जहाज नहीं, बल्कि भारत के संकल्प और मेहनत का प्रतीक (Symbol) है, जो समंदर की लहरों को चीरते हुए दुनिया को भारत की बढ़ती शक्ति का संदेश देगा। इस युद्धपोत के शामिल होने से हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा (Security) क्षमता कई गुना बढ़ गई है।

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