ahemdabadગુજરાત

गुजरात में फिर जलेगा ‘प्राइमस और लालटेन’: युद्ध के चलते LPG संकट गहराया

गुजरात में पिछले दो वर्षों से केरोसिन मुक्त होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन वैश्विक युद्ध (Global War) की परिस्थितियों के कारण अब राज्य में एक बार फिर मिट्टी के तेल की वापसी हुई है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई में भारी कमी आने की आशंका है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने गुजरात को 1452 किलोलीटर केरोसिन आवंटित (Allot) किया है। राज्य सरकार के नए फैसले के अनुसार, अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक राशन कार्ड धारक परिवार को 5 लीटर और संस्थाओं को 25 लीटर केरोसिन दिया जाएगा। हालांकि, इस बार केरोसिन की कीमतें आसमान छू रही हैं; वर्ष 2020 में जो तेल 15 रुपये लीटर मिलता था, वह अब कार्डधारकों को 61.40 रुपये से लेकर 66.14 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे दाम पर खरीदना होगा।

इस बदलाव ने गुजरात के ग्रामीण इलाकों के मध्यम और गरीब परिवारों के लिए ‘कोढ़ में खाज’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) के तहत गैस चूल्हों पर शिफ्ट हुए लोगों को अब दोबारा प्राइमस और लालटेन खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च (Expenditure) करना पड़ेगा। सरकार ने व्यवस्था की है कि हर तहसील के कम से कम एक पेट्रोल पंप पर केरोसिन उपलब्ध कराया जाए ताकि लोग इसे आसानी से प्राप्त कर सकें। परिवहन (Transport) और अन्य खर्चों के जुड़ने से केरोसिन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे जनता में रोष देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि धुआं मुक्त रसोई का वादा करने वाली सरकार को अब खुद वैकल्पिक ईंधन (Fuel) के रूप में केरोसिन की वकालत करनी पड़ रही है।

ads image

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *