गुजरात में डीजल का गंभीर संकट: थम सकते हैं 12 लाख ट्रकों के पहिए
इजरायल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते युद्ध (War) और वैश्विक अस्थिरता के कारण गुजरात के ट्रांसपोर्ट उद्योग पर गहरा संकट मंडराने लगा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में डीजल की भारी किल्लत (Shortage) देखी जा रही है, जिससे ट्रांसपोर्टर्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रक संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही ईंधन की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो गुजरात में करीब 12 लाख ट्रकों के पहिए पूरी तरह थम जाएंगे। पहले से ही आर्थिक मंदी (Recession) झेल रहे इस सेक्टर के लिए डीजल की यह कमी ‘कोढ़ में खाज’ जैसी साबित हो रही है। अपनी मांगों को लेकर ट्रांसपोर्ट संघों ने गुजरात सरकार से गुहार लगाई है कि सप्लाई चेन को सुचारू करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप (Intervention) किया जाए।
वर्तमान में सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हाईवे पर स्थित अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ‘स्टॉक नहीं है’ के बोर्ड लटके हुए हैं, जिसके कारण ट्रक चालकों को ईंधन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। जो पंप खुले भी हैं, वहां केवल सीमित मात्रा (Limited Quantity) में ही डीजल दिया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी के रूट पर जाने वाले ट्रक बीच रास्ते में ही फंसने की कगार पर हैं। ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अनिश्चितता और सप्लाई में आने वाले अवरोधों ने स्थानीय स्तर पर स्थिति को कफौड़ी बना दिया है। यदि सरकार ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आवश्यक वस्तुओं (Essential Goods) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई और बढ़ने का खतरा है।

