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नगरसेवक या ‘करोड़पति’ बनने का चुनाव? अहमदाबाद के पार्षदों की संपत्ति में 5 साल में 30 गुना तक उछाल

अहमदाबाद में आगामी नगर निगम चुनाव (Municipal Election) के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साल 2021 में पार्षद चुने गए कई उम्मीदवारों की संपत्ति में पिछले पांच वर्षों में रहस्यमयी और भारी बढ़ोतरी देखी गई है। चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र (Affidavits) के आंकड़ों से पता चलता है कि जिन पार्षदों के पास पांच साल पहले अपना घर या दुकान तक नहीं थी, वे आज गांधीनगर, विरमगाम और सुरेंद्रनगर जैसे इलाकों में बड़े जमींदार (Landlords) बन चुके हैं। बोडकदेव, थलतेज और वस्त्रापुर जैसे पॉश इलाकों में इनके नए बंगले बन गए हैं और घर के बाहर एक के बजाय तीन-चार महंगी गाड़ियाँ खड़ी हैं। जनता के बुनियादी काम भले ही अधूरे पड़े हों, लेकिन इन नगरसेवकों ने अपने परिवार का भविष्य फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जीवन बीमा और म्यूचुअल फंड के जरिए पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।

संपत्ति में वृद्धि के मामले में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेता सुर्खियों में हैं। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन हितेश बरोट, देवांग दानी और जैनिक वकील जैसे दिग्गज नेताओं की संपत्ति दो से तीन गुना बढ़ गई है। वहीं, विपक्ष के नेता शहजाद खान पठान की संपत्ति में करीब 30 गुना का भारी उछाल (Surge) दर्ज किया गया है। भाजपा उम्मीदवार मौलिक पटेल और कांग्रेस के नीरव बख्शी पांच साल के भीतर बड़े भूखंडों के मालिक बन गए हैं, जबकि कई अन्य पार्षदों ने नामी कंपनियों के लाखों के शेयर (Shares) खरीदकर अपने निवेश पोर्टफोलियो को मजबूत किया है। चुनावी मौसम में यह मुद्दा गरमाया हुआ है कि जो प्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए चुने गए थे, उन्होंने पांच साल के कार्यकाल (Tenure) का उपयोग जनहित के बजाय निजी तिजोरियां भरने में अधिक किया है।

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