द्वारकाधीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास की जन्माष्टमी की धूम: रात 12 बजे गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’, ठाकुर जी को सोने-चांदी के बर्तनों में धराया गया ’56 भोग’
धार्मिक नगरी देवभूमि द्वारका में कल 8 जून को पुरुषोत्तम मास (Adhik Maas) की जन्माष्टमी का पावन उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और अगाध श्रद्धा के साथ मनाया गया। पवित्र श्रावण मास में मनाए जाने वाले पारंपरिक जन्मोत्सव की तरह ही कल रात ठीक 12 बजे मुख्य मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान द्वारकाधीश का भव्य प्राकट्य उत्सव मनोरथ कराया गया। ठाकुर जी के जन्म की मंगलमयी महाआरती के समय ‘नंद घेर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और अलौकिक हो उठा। इस पवित्र अवसर पर द्वारका के एक प्रतिष्ठित भक्त परिवार के विशेष सहयोग से भगवान द्वारकाधीश के समक्ष भव्य ’56 भोग मनोरथ’ का आयोजन किया गया था। इस धार्मिक अनुष्ठान (Religious Ritual) के तहत जगतमंदिर में विराजमान भगवान कृष्ण को विभिन्न प्रकार के छप्पन भोग और विशिष्ट व्यंजन सोने-चांदी के बर्तनों में कलात्मक ढंग से सजाकर अर्पित किए गए, जिसका अलौकिक दर्शन लाभ लेकर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
चूंकि वर्तमान में पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन चल रहे हैं और इस पवित्र महीने का आखिरी सप्ताह होने के कारण इस अधिक मास का विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त करने के लिए लाखों की संख्या में तीर्थयात्री लगातार द्वारका की ओर रुख कर रहे हैं। भगवान के अनन्य जन्मोत्सव दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की इस विशाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए द्वारकाधीश देवस्थान समिति और स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा यात्रियों के सुचारू दर्शन के लिए व्यापक व्यवस्था (Arrangements) सुनिश्चित की गई थी। देवभूमि द्वारका जिले के कलेक्टर और जिला पुलिस प्रमुख जयराज सिंह के सीधे मार्गदर्शन और कड़े सुपरविजन (Supervision) के तहत पूरे सुरक्षा तंत्र का संचालन किया गया, जबकि देवस्थान समिति के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर ने धरातल पर सभी आवश्यक प्रबंधों की बारीकी से निगरानी की। इस सुव्यवस्थित कोऑर्डिनेशन (Coordination) के परिणामस्वरूप लाखों की तादाद में आए भाविकों ने बिना किसी असुविधा और बाधा के बेहद शांतिपूर्ण तरीके से जगतगुरु के दर्शन किए और उत्सव का भरपूर आनंद उठाया।

