ગુજરાત

गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: नल सरोवर और थोल पक्षी अभयारण्य में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य के पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए प्रसिद्ध नल सरोवर और थोल पक्षी अभयारण्य (Bird Sanctuary) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्लास्टिक की वस्तुओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन दोनों प्रमुख इको-सेंसिटिव जोन (Eco Sensitive Zone) के भीतर प्लास्टिक कचरे के फैलाव को रोकने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं। इस महत्वपूर्ण मामले पर सरकार के सभी संबंधित विभागों ने हाई कोर्ट में अपने-अपने हलफनामे (Affidavits) भी प्रस्तुत किए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि इस आदेश का उद्देश्य पर्यटन को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि वहां आने वाले प्रवाासियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है, जिसके तहत अब सभी पर्यटकों को अनिवार्य रूप से केवल स्टील की पानी बोतलों (Steel Bottles) का ही उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।

इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने अभयारण्य क्षेत्रों के भीतर चलने वाली बोटिंग गतिविधियों को पूरी तरह से नियमित (Regulated) करने और नाविकों के लिए आधिकारिक लाइसेंस (License) अनिवार्य करने की हिदायत दी है। अदालत ने सरकार को टोकते हुए कहा कि पिकनिक मनाने आने वाले कई पर्यटक पक्षियों को बाहरी खान-पान की चीजें खिलाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, इसलिए इस गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों के भोजन करने पर पाबंदी नहीं है, लेकिन ऐसे पिकनिक स्पॉट को मुख्य संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों से दूर रखा जाना चाहिए ताकि वहां प्रदूषण न फैले। पक्षी अभयारण्यों के पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए उठाए जा रहे इन कड़े कदमों और नियमों की जमीनी समीक्षा के लिए इस पूरे मामले की अगली सुुनवाई (Court Hearing) आगामी सप्ताह में निर्धारित की गई है।

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