नागपंचमी पर विशेष: गुजरात में 63 में से 59 सांप पूरी तरह बिन-जैहरीले
पवित्र श्रावण मास के जन्माष्टमी पर्व श्रृंखला के तहत 1 सितंबर को नागपंचमी का त्योहार श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। भारत में भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाने वाले सर्प को कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में सांपों की 270 और गुजरात में 63 प्रजातियां पाई जाती हैं। राहत की बात यह है कि गुजरात में पाई जाने वाली 59 प्रजातियां पूरी तरह बिन-जहरीली (Non-Venomous) होती हैं और केवल 4 प्रजातियां ही जहरीली हैं। राज्य में हर साल सर्पदंश (Snakebite) के लगभग 10 से 15 हजार मामले दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से केवल 5 से 10 प्रतिशत मामले ही जहरीले सांपों के काटने के होते हैं। इसके चलते सही समय पर उपचार मिलने से मृत्यु दर महज 1 से 2 प्रतिशत ही रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्पदंश से होने वाली मौतों के लिए न्यूरोटॉक्सिक (Neurotoxic), हीमोटोक्सिक और कार्डियाक टॉक्सिक जहर मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। गुजरात में इंडियन कोबरा और कॉमन क्रेट का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो नर्वस सिस्टम (Nervous System) को प्रभावित कर पैरालिसिस (Paralysis) और सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है। वहीं, रसेल्स वाइपर (Russell’s Viper) और सॉ-स्केल्ड वाइपर का जहर हीमोटोक्सिक होता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव होता है। सांप जहरीला हो या बिन-जहरीला, सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत वेंटिलेटर (Ventilator) सुविधा वाले नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, क्योंकि इसका एकमात्र वैज्ञानिक इलाज एंटी-वेनम (Anti-Venom) इंजेक्शन ही है।

