चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: अब मार्कर पेन से नहीं लगेगी चुनावी स्याही, विवाद के बाद बदला नियम
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भविष्य के चुनावों में मार्कर पेन (Marker Pen) के उपयोग को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। यह नया नियम आगामी जिला परिषद चुनावों से प्रभावी होगा। इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण हाल ही में बीएमसी (BMC) चुनावों के दौरान सामने आया ‘स्याही विवाद’ है, जहाँ मतदाताओं की उंगली पर लगाया गया निशान आसानी से मिट जाने की शिकायतें मिली थीं। मनसे (MNS) उम्मीदवार उर्मिला तांबे ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि स्याही की गुणवत्ता (Quality) बेहद खराब है, जिससे फर्जी वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है। मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एसीटोन (Acetone) की मदद से यह स्याही तुरंत साफ हो गई, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
इस विवाद के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार किया, जिसमें शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी चुनावी पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की थी। बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने भी यह स्वीकार किया कि मार्कर पेन से लगाया गया निशान स्थायी (Permanent) नहीं होता। हालांकि आयोग के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने सफाई दी कि यह पद्धति 2012 से चली आ रही है, लेकिन व्यापक विरोध और सुरक्षा (Security) कारणों को देखते हुए अब पुरानी ‘अमिट स्याही’ वाली पद्धति को वापस लाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा (Trust) फिर से बहाल होने की उम्मीद है और भविष्य में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या फर्जी मतदान (Fake Voting) को रोकने में मदद मिलेगी।

