गुजरात में गैस संकट रोकने के लिए सरकार का मास्टर प्लान: घरों के ‘चूल्हे’ रहेंगे सुरक्षित
मिडल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध (War) का सीधा असर अब गुजरात के ऊर्जा क्षेत्र पर दिखने लगा है। वैश्विक संकट के बीच राज्य में गैस की आपूर्ति (Supply) सुचारू बनाए रखने के लिए गुजरात सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने स्पष्ट किया है कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता (Priority) राज्य के सामान्य नागरिकों के घरों में रसोई गैस पहुंचाना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने औद्योगिक गैस (Industrial Gas) की आपूर्ति में 50 प्रतिशत की भारी कटौती करने का फैसला किया है। इसके अलावा, उर्वरक कंपनियों और दूध की डेयरियों में इस्तेमाल होने वाली गैस में भी 40 प्रतिशत की कटौती (Reduction) लागू की गई है। सरकार का उद्देश्य यह है कि उद्योगों के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना न करना पड़े।
केंद्र सरकार ने भी कालाबाजारी और जमाखोरी (Hoarding) को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय ग्राहकों के लिए गैस की कीमतों में वृद्धि की संभावना नगण्य है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए औद्योगिक उपयोग वाले एलएनजी (LNG) के स्टॉक को अब घरों की ओर डायवर्ट (Divert) किया जाएगा। राहत की बात यह है कि घरेलू ग्राहकों के लिए गैस की दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे जनता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों के बीच बड़ी सुरक्षा (Security) मिलेगी। सरकार वर्तमान में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बारीकी से निगरानी कर रही है ताकि पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई वास्तविक कमी न हो।

