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गुजरात में गैस संकट का ‘जायके’ पर वार: होटलों से समोसे-भजिया गायब, ₹4500 में मिल रहा सिलेंडर

इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने गुजरात के होटल-कैटरिंग उद्योग (Catering Industry) को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य में कमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial Cylinder) की सप्लाई चेन बाधित होने से विशेष रूप से हाईवे पर स्थित होटलों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई होटलों के बाहर ‘भजिया और समोसा जैसे तले हुए व्यंजन नहीं मिलेंगे’ के बोर्ड (Signboards) लगा दिए गए हैं। अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में भी खाने-पीने की छोटी रेहड़ियां बंद हो गई हैं। व्यापारियों का आरोप है कि ब्लैक मार्केट (Black Market) में सिलेंडर की कीमत ₹4500 तक पहुंच गई है, जिससे व्यवसाय चलाना नामुमकिन हो गया है। सरकारी दावों के विपरीत, जमीन पर गैस की भारी किल्लत (Shortage) देखी जा रही है, जिससे रेस्टोरेंट का कारोबार पूरी तरह चरमरा गया है।

गैस न मिलने के कारण होटल संचालकों ने अब लकड़ी और कोयले (Coal) जैसे पारंपरिक ईंधन का विकल्प चुन लिया है। इसके चलते होटलों के आधुनिक रसोईघरों में एक बार फिर पुराने जमाने जैसा ‘धुआं’ (Smoke) दिखाई दे रहा है। मांग बढ़ने का फायदा उठाते हुए कोयला विक्रेताओं ने भी कीमतों में 20% का इजाफा (Increase) कर दिया है। होटल मालिकों का कहना है कि गैस के अभाव में कई लोकप्रिय व्यंजन (Dishes) बंद करने पड़े हैं और केवल जरूरी भोजन ही बनाया जा रहा है। इस संकट के कारण ग्राहकों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है, जिससे दैनिक आय (Daily Income) प्रभावित हुई है। स्थानीय प्रशासन और पेट्रोलियम मंत्रालय की निगरानी के बावजूद आपूर्ति सुचारू नहीं हो पा रही है, जिससे छोटे व्यापारियों में भविष्य को लेकर काफी डर का माहौल है।

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