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‘वाइब्रेंट गुजरात’ के दावों के बीच जमीनी हकीकत: 5 साल में 8 हजार से ज्यादा MSME इकाइयों पर जड़े ताले, बेरोजगारी का बढ़ा खतरा

करोड़ों रुपये के खर्च से होने वाले ‘वाइબ્રન્ટ गुजरात’ (Vibrant Gujarat) शिखर सम्मेलनों के जरिए राज्य की जो भव्य औद्योगिक तस्वीर दिखाई जाती है, केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट (Report) ने उसे एक बड़ा झटका दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में गुजरात में 8,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) बंद हो गए हैं। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ये उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार (Employment) के सबसे बड़े स्रोत माने जाते हैं। विडंबना यह है कि जब सरकार ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (One District-One Product) जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब राज्य के विभिन्न जिलों की पहचान माने जाने वाले छोटे उद्योग दम तोड़ रहे हैं। औद्योगिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार इन इकाइयों को बचाने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है या उसका पूरा ध्यान केवल बड़े निवेशों (Investments) पर ही केंद्रित है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2025-26 के दौरान एमएसएमई बंद होने की रफ्तार सबसे अधिक रही है। इस सूची में अहमदाबाद (Ahmedabad) जिला सबसे ऊपर है, जहां पिछले पांच वर्षों में कुल 3,106 इकाइयां बंद हुई हैं, जिनमें से अकेले 2025-26 में ही 1,242 उद्योगों पर ताले लग गए। इसके बाद सूरत दूसरे, राजकोट तीसरे, वडोदरा चौथे और वलसाड पांचवें स्थान पर आता है। इन उद्योगों के बंद होने से न केवल अर्थव्यवस्था (Economy) पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं का शहरों की ओर पलायन (Migration) भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लघु और मध्यम उद्योगों को समय पर प्रोत्साहन और ऋण (Credit) सहायता नहीं मिली, तो आने वाले समय में बेरोजगारी की समस्या और अधिक विकराल रूप ले सकती है।

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