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गुजरात में कुदरत का कहर: अप्रैल में ‘असाढ़ी’ जैसा मंजर, द्वारका और सोमनाथ में डेढ़ इंच बारिश, आंधी-तूफान के बीच फसलों को भारी नुकसान

गुजरात में वसंत ऋतु के बीच अचानक आए मौसम के बदलाव ने पूरे राज्य को ‘असाढ़ी’ माहौल में बदल दिया है। उत्तर गुजरात के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) और अफगानिस्तान से आए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) के कारण देवभूमि द्वारका, जामकल्याणपुर और सोमनाथ-वेरावल जैसे क्षेत्रों में डेढ़ इंच तक मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। वेरावल की सड़कों पर बिजली की कड़कड़ाहट के साथ पानी इस तरह बहने लगा जैसे नदियां उफान पर हों। सोमनाथ और द्वारका जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों (Pilgrimage Sites) पर जलभराव के कारण श्रद्धालुओं को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। राज्य के लगभग 20 स्थानों पर शुक्रवार को 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं ने सामान्य जनजीवन (Public Life) को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

मौसम के इस क्रूर प्रहार (Hit) ने गुजरात के किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में कटाई के लिए तैयार गेहूं, जीरा और गर्मियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। विशेष रूप से तालाલા गिर में बेमौसम बारिश (Unseasonal Rain) के कारण विश्व प्रसिद्ध केसर आम की फसल के खराब होने का डर सता रहा है। कच्छ के अंजार, मुंद्रा और गांधीधाम के साथ-साथ पाटन, मेहसाणा और बनासकांठा के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि और छिटपुट बारिश देखी गई। कृषि विशेषज्ञों (Agriculture Experts) के अनुसार, गीली मिट्टी और तेज हवाओं के कारण फसलों के गिरने से पैदावार में भारी कमी आ सकती है। अहमदाबाद और गांधीनगर सहित मध्य गुजरात में भी बादलों की आवाजाही के साथ धूल भरी आंधी (Dust Storm) का असर देखा गया, जिससे तापमान में तो गिरावट आई है, लेकिन किसानों के लिए यह आफत बनकर बरसा है।

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