ईरान के युद्ध क्षेत्र से निकले गुजरात के 72 मछुआरे: 1500 किमी दूर आर्मेनिया के लिए हुए रवाना
ईरान और इजरायल के बीच पिछले एक महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध (War) के कारण ईरान के किस्ट द्वीप (Kist Island) पर फंसे गुजरात के 72 मछुआरों के लिए राहत की खबर आई है। उમરગામ सहित गुजरात के विभिन्न हिस्सों के ये मछुआरे पिछले 35 दिनों से अपनी जान बचाने के लिए नावों में शरण लिए हुए थे। युद्ध की स्थिति बिगड़ने और आर्थिक तंगी (Financial Crisis) के चलते मछुआरों ने ईरान सरकार से वीजा के लिए गुहार लगाई थी, जिसके बाद उन्हें पड़ोसी देश आर्मेनिया जाने के लिए 20 दिनों का वीजा (Visa) प्रदान किया गया है। वर्तमान में ये सभी मछुआरे सड़क मार्ग से 1500 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर आर्मेनिया के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि वहां से सुरक्षित भारत वापस आ सकें।
मछुआरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो (Video) जारी कर अपनी व्यथा सुनाई है कि युद्ध के कारण उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई है और अब उनके पास भारत लौटने के लिए हवाई टिकट के पैसे भी नहीं बचे हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि उन्हें आर्मेनिया एयरपोर्ट (Airport) से दुबई के रास्ते भारत लाने का विशेष प्रबंध (Arrangement) किया जाए। गौरतलब है कि आर्मેनिया में पहले से ही भारत आने के इंतजार में करीब 1000 से अधिक लोग फंसे हुए हैं। मछुआरों की चिंता यह भी है कि यदि 20 दिनों की वीजा अवधि (Visa Period) के भीतर वे भारत नहीं पहुंच पाए, तो उनका वीजा रद्द हो सकता है और उन्हें दोबारा युद्धग्रस्त ईरान वापस भेजा जा सकता है। इन मछुआरों के परिवारों ने भी विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप (Intervention) कर जल्द से जल्द सुरक्षित वतन वापसी की मांग की है।

