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परमाणु जगत में भारत का डंका: कल्पक्कम के PFBR ने हासिल की ‘क्रिटिकालिटी’, रूस के बाद भारत बना दुनिया का दूसरा देश

भारतीय विज्ञान और ऊर्जा क्षेत्र में आज सात दशकों के लंबे इंतजार के बाद एक नया इतिहास रचा गया है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकાલિટી’ (Criticality) प्राप्त कर ली है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ भारत अब रूस के बाद दुनिया का वह दूसरा शक्तिशाली देश बन गया है जिसने ऑटोमोड (Auto-mode) में न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू करने में सफलता पाई है। यह केवल एक तकनीकी जीत नहीं है, बल्कि परमाणु विज्ञान के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा 1950 के दशक में देखे गए आत्मनिर्भर भारत के सपने का साकार होना है। 500 मेगावाट की क्षमता वाला यह रिएक्टर अब पूरी तरह से नियंत्रित तरीके से परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) पैदा करने के लिए तैयार है।

इस रिएक्टर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘ब्रीडर’ (Breeder) तकनीक पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि यह बिजली पैदा करने के साथ-साथ अपने उपयोग के लिए आवश्यक ईंधन से भी अधिक ईंधन पैदा करेगा। भारत के पास यूरेनियम (Uranium) के सीमित भंडार हैं, लेकिन दुनिया का लगभग 25% थोरियम (Thorium) भंडार भारत के पास मौजूद है। डॉ. भाभा के ‘थ्री-स्टेज’ परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) के अनुसार, यह उपलब्धि भारत को भविष्य में थोरियम के उपयोग की ओर ले जाएगी, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतें सदियों तक सुरक्षित हो सकेंगी। इस जटिल प्रक्रिया (Complex Process) के सफल होने से भारत अब वैश्विक स्तर पर परमाणु महाशक्ति (Superpower) के रूप में मजबूती से उभरा है, जो भविष्य में शून्य कार्बन उत्सर्जन और सस्ती बिजली के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।

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