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अब पेट्रोल की जगह एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियाँ!

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा और क्रांतिकारी (Revolutionary) निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। सरकार अब सीधे E85 फ्यूल लाने का मसौदा (Draft) तैयार कर रही है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में गाड़ियों में पेट्रोल की मात्रा कम और एथेनॉल का मिश्रण बहुत अधिक होगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालता है। तेल संकट से निपटने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग एक संजीवनी साबित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने आंतरिक सहमति (Internal Consensus) बना ली है और प्राथमिक परीक्षण भी सफल रहे हैं। गन्ने, मक्का और अनाज से निर्मित यह रिन्यूएबल (Renewable) ईंधन न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि इससे सीधे तौर पर देश के किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

हालांकि, इस नए E85 फ्यूल का उपयोग मौजूदा सामान्य इंजन वाली गाड़ियों में नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए विशेष प्रकार के ‘फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल’ (FFV) इंजन की आवश्यकता होगी, जिसे लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लगातार वाहन निर्माता कंपनियों पर दबाव बना रहे हैं। सामान्य इंजन (Conventional Engine) में अधिक एथेनॉल वाला ईंधन डालने से इंजन के पुर्जे खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए नई तकनीक वाले इंजनों का उत्पादन अनिवार्य होगा। पिछले एक दशक में एथेनॉल का मिश्रण 1-2% से बढ़कर 20% तक पहुँच गया है, जिससे सालाना करीब साढ़े चार करोड़ बैरल तेल का आयात (Import) कम हुआ है। अब E85 के आने से देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत की आत्मनिर्भरता और अधिक मजबूत होगी।

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